शिक्षण प्रणाली का बदलता स्वरूप: परम्परागत से ICT आधारित शिक्षा तक का सफर

शिक्षण प्रणाली का बदलता स्वरूप: परम्परागत से ICT आधारित शिक्षा तक का सफर

विकास विद्यालंकार 

दार्शनिक

शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है। समय के साथ न केवल सीखने की सामग्री बदली है, बल्कि शिक्षण प्रणालियाँ (Teaching Systems) भी पूरी तरह बदल चुकी हैं। आज के इस डिजिटल युग में, जहाँ हम 'स्मार्ट क्लासरूम' की बात करते हैं, वहीं हमारी जड़ों में आज भी 'परम्परागत शिक्षा' का महत्व बना हुआ है।

इस ब्लॉग में हम शिक्षण की तीन मुख्य श्रेणियों—परम्परागत (Traditional), आधुनिक (Modern) और ICT आधारित प्रणालियों के बीच के अंतर और उनके महत्व को समझेंगे।

1. परम्परागत शिक्षण प्रणाली (Traditional Teaching System)

परम्परागत शिक्षा, जिसे हम अक्सर 'चाक और टॉक' (Chalk and Talk) विधि कहते हैं, सदियों से चली आ रही है। इसमें शिक्षक केंद्र में होता है।
मुख्य विशेषताएँ:
  • शिक्षक-केंद्रित: शिक्षक ज्ञान का मुख्य स्रोत होता है और छात्र मुख्य रूप से सुनने वाले (Listeners) होते हैं।
  • प्रत्यक्ष संवाद: गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार आमने-सामने बैठकर शिक्षा दी जाती है।
  • सीमित संसाधन: इसमें मुख्य रूप से पाठ्यपुस्तकों, ब्लैकबोर्ड और मौखिक व्याख्यान का उपयोग होता है।
लाभ: - इसमें अनुशासन और नैतिक मूल्यों पर अधिक जोर दिया जाता है। छात्रों और शिक्षकों के बीच एक गहरा मानवीय संबंध स्थापित होता है।

2. आधुनिक शिक्षण प्रणाली (Modern Teaching System)

आधुनिक शिक्षण प्रणाली ने छात्र को केंद्र (Student-Centered) में रखा है। यहाँ रटने के बजाय समझने और 'करके सीखने' (Learning by doing) पर जोर दिया जाता है।
मुख्य विशेषताएँ:
  • छात्र-केंद्रित: छात्रों की व्यक्तिगत क्षमताओं और रुचियों के अनुसार शिक्षण पद्धति अपनाई जाती है।
  • इंटरैक्टिव लर्निंग: चर्चाओं, प्रयोगों और व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से पढ़ाया जाता है।
  • समग्र विकास: केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि खेल-कूद, कला और कौशल विकास पर भी ध्यान दिया जाता है।
लाभ: - यह छात्रों में विश्लेषणात्मक सोच (Analytical Thinking) और समस्या समाधान (Problem Solving) के कौशल विकसित करती है।

3. आई सी टी आधारित शिक्षण प्रणाली (ICT-Based Teaching System)

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology - ICT) ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। यह आधुनिक शिक्षा का ही एक उन्नत तकनीकी हिस्सा है।
मुख्य घटक:
  • ई-लर्निंग (e-Learning): इंटरनेट के माध्यम से कहीं भी, कभी भी शिक्षा प्राप्त करना।
  • स्मार्ट टूल्स: प्रोजेक्टर, इंटरेक्टिव व्हाइटबोर्ड, टैबलेट और शैक्षिक ऐप्स का उपयोग।
  • मल्टीमीडिया: वीडियो, एनिमेशन और ग्राफिक्स के माध्यम से कठिन विषयों को सरल बनाना।
  • एलएमएस (LMS): लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए होमवर्क, टेस्ट और प्रोग्रेस को ट्रैक करना।
लाभ: - यह शिक्षा को 'सुगम' और 'सस्ता' बनाती है। भौगोलिक सीमाएँ खत्म हो जाती हैं और छात्र दुनिया के बेहतरीन शिक्षकों से जुड़ सकते हैं।

परम्परागत बनाम ICT आधारित शिक्षा: एक तुलनात्मक नजरिया

आधार

परम्परागत शिक्षण

ICT आधारित शिक्षण

दृष्टिकोण

शिक्षक-केंद्रित

छात्र-केंद्रित एवं तकनीक-संचालित

लचीलापन

समय और स्थान निश्चित होता है

समय और स्थान का लचीलापन (Anytime, Anywhere)

संसाधन

पुस्तकें, ब्लैकबोर्ड

इंटरनेट, वीडियो, ई-बुक्स

सहभागिता

सीमित (Passive)

अत्यधिक सक्रिय (Interactive)

इस प्रकार आज की आवश्यकता किसी एक प्रणाली तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि 'ब्लेंडेड लर्निंग' (Blended Learning) की है। इसका अर्थ है—परम्परागत शिक्षा के अनुशासन और मानवीय स्पर्श को आधुनिक तकनीक (ICT) के साथ मिला देना।
जहाँ परम्परागत शिक्षा हमें संस्कार और बुनियाद देती है, वहीं ICT आधारित शिक्षा हमें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करती है। एक बेहतर भविष्य के लिए इन तीनों प्रणालियों का संतुलन ही सबसे प्रभावी मार्ग है।

अधिक जानकारी और रोचक तरीके से समझने के लिए वीडियो पूरा देखें -


यूजीसी नेट के प्रथम प्रश्न-पत्र सम्बन्धी वीडियो

यहाँ आप सम्पूर्ण कोर्स बस एक क्लिक पर पढ़ सकते हैं। 

Teaching Aptitude

डाइरेक्ट महत्वपूर्ण वीडियो लिंक्स 






अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे शेयर करें। 

Comments

Popular posts from this blog

शिक्षण की अवधारणा