हिंदुओं की संस्कृति धर्म से बिगड़ी है ?
धर्म और संस्कृति: भारतीय समाज का आधार भारत एक ऐसा देश है जहाँ धर्म और संस्कृति का अटूट संबंध है। यहाँ की जीवनशैली, परंपराएँ और सामाजिक संरचना इन दोनों तत्वों से गहराई से प्रभावित होती हैं। “धर्मेण गमनमूर्ध्वम्, गमनमधस्तात् भवत्यधर्मेण।” इस सूक्ति में गहराई से यह बात कही गई है कि धर्म के माध्यम से व्यक्ति या समाज उन्नति करता है, जबकि अधर्म के पथ पर चलकर पतन की ओर जाता है। धर्म: आत्मा और समाज का मार्गदर्शक धर्म केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मा और अनात्मा, जीवात्मा और शरीर का विधायक है। यह व्यक्ति के आचरण और समाज के ढांचे को निर्धारित करता है। धर्म के माध्यम से प्रजा का धारयण होता है, अर्थात् समाज को स्थिरता और दिशा मिलती है। संस्कार: विकास की कुंजी संस्कार हर जीवात्मा और शरीर का विकास करने वाला तत्व है। यह व्यक्तियों को उनके दोष, पाप, और दुष्कृतियों से मुक्त कराकर उन्हें ऊँचाई पर ले जाता है। संस्कार केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के विकास में भी अहम भूमिका निभाता है। अज्ञान और अधर्म: समाज के लिए बाधा अज्ञान को अधर्म का पर्याय माना गया है। यह ...